
तुमने आधा ही कहा था..
क्यों तुम्हें लानत भेजूं
आधी खुली खिड़की से
आधा चाँद ही तो
बाहर निकला था..
क्यों तुम्हें शापित कहूं ?
देह के लावे से बाहर
आधा आसमान ही तो
टूट कर गिरा था..
मैं ऐसा क्यों कहूं ?
मेरी आधी हैसियत के साथ
तुम्हारे हिस्से की
आधी भावुकता ही तो
तड़फड़ाती थी.
आधे किनारे पर डूबकर
आधा स्वप्न ही तो पिघला था..
मैं ऐसा क्यों कहूं ?
क्यों तुम्हें लानत भेजूं ?
चलो छोड़ो भी ...
आधी-आधी नैतिकता
आधा-आधा संकल्प.
पवित्र फासलों में
कुछ तो मुकम्मल हो जाने दो..