बुधवार, 11 दिसंबर 2013

सनकी आदमी...

दुःख की गांती बांधे
क्यों दिख रही है मुझे
बासी भात की खुशबू ?
पीड़ा की काई पर
क्यों पनप रहा है
बेचारगी का वृक्ष ?
सवाल इससे ज्यादा है....
अदहन के शोर में
चिल्लाते, मगज खपाते
पिचके..चिपटे बर्तन
मुझे लिखने नहीं देते
कोई प्रेम कहानी ...
आग के पास बचे-खुचे
मौन से राख तक की यात्रा के अवशेष
मुझे उड़ने नहीं देते
निर्द्वन्द ... नीले आकाश में
मेरे भीतर का सनकी आदमी
शब्द क्यों ठेलता है ?
मेरा सवाल इससे कहीं ज्यादा है......

19 टिप्‍पणियां:

  1. वाकई सवाल तो इतने ज्‍यादा हैं कि हममें से जीते जी किसी को उनके सार्थक उत्‍तर मिलने से रहे, ऐसे फंसा दिया गया है सुगम जीवन को दुर्गम व्‍यवस्‍था के पाटों के बीच।

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  2. सवाल तो बहुत हैं ... इससे आगे और आगे ... पर उनका उत्तर मिले तो ...
    आँखें बंद करना भी इलाज नहीं रहा ...

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  3. पता नही क्यों पढ़ते हुए एक मुस्कराहट दौड़ गयी ..उस सनक को पछाड़ने के लिए..और सवाल तो हारा हुआ है ही..

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  4. उस आदमी को सनकी कहना ही बता देता है कि कितने संवेदनशील ह्रदय ने इन पंक्तियों को लिखा है. जिसका चित्र आपने खींचा है.. सब देख सकते नहीं. और जो देखते है वो उसे महसूस नहीं कर पाते.

    गांती और अदहन से ह्रदय जीत लिया. अपनी मिटटी से सने ऐसे शब्द विस्मृत से हो गए हैं मेरे मन से.

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  5. वाह ! भाई साहब बेहतरीन अंदाज़ की रचना है। रूपक है सशक्त भावनाओं का। शुक्रिया आपकी टिपण्णी का।

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  6. कहाँ से लाते हैं आप भावानुरूप शब्दावली भावपूर्ण अर्थपूर्ण रूपकत्व लिए। शुक्रिया भाई साहब आपकी स्नेह पूर्ण टिप्पणियों का।

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  7. जीवन की जद्दोजहद के बीच भी बचाए रखना है कुछ कोमलता और कुछ शब्द जिससे कविता सांस ले सके ...
    गहन एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति .

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (14-12-13) को "वो एक नाम" (चर्चा मंच : अंक-1461) पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  9. जीवन के उबड़ खाबड़ रस्ते में सवाल ही सवाल है परन्तु उत्तर...???????....सुन्दर अभिव्यक्ति
    नई पोस्ट विरोध
    new post हाइगा -जानवर

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  10. राग अनुराग बैराग का भाव लिए सुन्दर रचना। शुक्रिया दोस्त।

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  11. बहुत कुछ सोचने पर विवश करती रचना..

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  12. अनुत्तरित प्रश्नों से सजी कविता बढ़िया है |

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  13. बहुत बढ़िया प्रस्तुति...आप को मेरी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

    नयी पोस्ट@एक प्यार भरा नग़मा:-तुमसे कोई गिला नहीं है

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  14. sawaal kabhi khatam nahi ho sakte.. bahut hi badiya likha hai aapne..
    Nav-Varsh ki shubhkamnayein..
    Please visit my Tech News Time Website, and share your views..Thank you

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  15. काफी गहरी बात..सुंदर रचना।।।

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  16. गहन भाव लिये ...उत्‍कृ
    ष्‍ट अभिव्‍यक्ति

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  17. कई पीड़ादायी सवाल हैं सामने जिसे देखते भी नहीं बनता और जिससे मुँह मोड़ते भी नहीं बनता
    सार्थक गहन भाव .....
    सादर !

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